Pakistan इस समय केवल आर्थिक और राजनीतिक संकट से नहीं जूझ रहा, बल्कि अब वहां का सबसे बड़ा संकट लोगों की रसोई तक पहुंच चुका है। हालात ऐसे हो गए हैं कि घरों में सुबह की शुरुआत चाय या नाश्ते से नहीं, बल्कि इस चिंता से हो रही है कि “आज गैस कब आएगी?”
कराची की 60 वर्षीय फरहत कुरैशी की जिंदगी भी अब इसी गैस टाइमटेबल के इर्द-गिर्द घूमने लगी है। कभी बिना घड़ी देखे आराम से खाना बनाने वाली फरहत अब सुबह उठते ही सबसे पहले गैस की सप्लाई चेक करती हैं। अगर तय समय पर गैस नहीं आई, तो पूरे दिन का रूटीन बिगड़ जाता है।
उनका कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा दौर कभी नहीं देखा, जहां खाना बनाना भी एक संघर्ष बन जाए। अब उनकी सुबह का हर मिनट इस हिसाब से गुजरता है कि गैस कितनी देर तक रहेगी और उस दौरान कितना खाना तैयार किया जा सकता है।
⛽ युद्ध के बाद और गहराया संकट
पाकिस्तान का ऊर्जा संकट पहले से ही गंभीर था, लेकिन हाल ही में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद स्थिति और बिगड़ गई।
ईरान क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस की सप्लाई प्रभावित हुई। पाकिस्तान पहले ही घरेलू गैस उत्पादन में गिरावट झेल रहा था और अब आयातित गैस की कमी ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है।
पाकिस्तान अपनी बिजली और घरेलू गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर और यूएई से आने वाली एलएनजी पर निर्भर करता है। लेकिन युद्ध के बाद जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई और गैस की खेप कम हो गई।
मार्च महीने में पाकिस्तान को जहां सामान्य तौर पर 8 से 12 एलएनजी शिपमेंट मिलती थीं, वहीं इस बार केवल दो शिपमेंट ही पहुंच पाईं। इसका असर सीधे घरों की रसोई पर पड़ा।
🍲 अब गैस नहीं, “टाइम स्लॉट” में बनता है खाना
कराची, लाहौर और इस्लामाबाद जैसे बड़े शहरों में अब गैस कुछ घंटों के लिए ही आती है।
सुबह लगभग 6 बजे से 9 बजे तक, फिर दोपहर में कुछ समय और शाम को 6 बजे से रात 9 बजे तक गैस सप्लाई दी जाती है। लेकिन सप्लाई इतनी कमजोर होती है कि एक साधारण दाल या रोटी बनाने में भी बहुत ज्यादा समय लग जाता है।
घरों की महिलाएं अब गैस आने से पहले ही पूरी तैयारी कर लेती हैं। सब्जियां काटकर रखी जाती हैं, आटा पहले से गूंथ लिया जाता है और खाना जल्दबाजी में तैयार किया जाता है।
अगर कोई तय समय चूक जाए, तो फिर या तो खाना अधूरा रह जाता है या माइक्रोवेव और एलपीजी सिलेंडर का सहारा लेना पड़ता है।
👩 महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर
इस संकट का सबसे बड़ा बोझ महिलाओं पर पड़ा है।
पाकिस्तान में घर के कामों को अब भी “गैर-आर्थिक काम” माना जाता है, लेकिन गैस संकट ने महिलाओं की मेहनत कई गुना बढ़ा दी है।
उन्हें अब पहले से ज्यादा जल्दी उठना पड़ता है, पूरे दिन गैस के हिसाब से काम बांटना पड़ता है और परिवार के खाने का समय भी बदलना पड़ रहा है।
24 वर्षीय शिक्षिका लैबा जाहिद बताती हैं कि अब उनकी जिंदगी गैस की टाइमिंग से कंट्रोल हो रही है।
उनके मुताबिक, रात का खाना जल्दी बनाना मजबूरी हो गया है क्योंकि रात 9 बजे के बाद गैस का प्रेशर लगभग खत्म हो जाता है।
अगर वे ऑफिस से लौटने के बाद तुरंत खाना गर्म न करें, तो फिर गैस चली जाती है और माइक्रोवेव में खाना गर्म करना पड़ता है, जिससे खाना सूख जाता है और स्वाद भी खराब हो जाता है।
☕ चाय तक हुई “लक्जरी”
पाकिस्तान में चाय केवल एक पेय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। लेकिन अब शाम की चाय भी गैस सप्लाई पर निर्भर हो गई है।
लैबा बताती हैं कि पहले वे शाम को आराम से चाय पीती थीं, लेकिन अब गैस की वजह से चाय उनकी जिंदगी से लगभग गायब हो गई है।
यह सिर्फ खाने का संकट नहीं, बल्कि लोगों की छोटी-छोटी खुशियों के खत्म होने की कहानी भी बन चुका है।
📉 आर्थिक संकट और महंगाई ने बढ़ाई परेशानी
गैस संकट ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान पहले ही रिकॉर्ड महंगाई से जूझ रहा है।
एलपीजी सिलेंडर महंगे हो चुके हैं, बिजली बिल बढ़ रहे हैं और आम लोगों की आय लगातार घट रही है।
कई परिवार अब एक वक्त का खाना कम करने लगे हैं ताकि खर्च बचाया जा सके।
बाहर खाना खाना भी हर किसी के लिए संभव नहीं है, खासकर उन परिवारों के लिए जिनमें पांच या उससे ज्यादा सदस्य हैं।
⚡ बिजली है, लेकिन “क्लीन कुकिंग” नहीं
विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में आधे से कम घरों के पास साफ और भरोसेमंद कुकिंग सिस्टम मौजूद है।
शहरी इलाकों में पाइप गैस सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है, लेकिन अब इसकी सप्लाई भी अनिश्चित हो चुकी है।
एलपीजी को बैकअप विकल्प माना जाता है, लेकिन इसकी कीमतें गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी हैं।
🌍 सिर्फ ऊर्जा संकट नहीं, सामाजिक संकट भी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल गैस की कमी नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता का संकेत है।
जब किसी देश में लोगों की दिनचर्या, नींद, भोजन और पारिवारिक समय तक गैस सप्लाई तय करने लगे, तो यह संकट केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।
पाकिस्तान के लाखों परिवार आज इसी अनिश्चितता में जी रहे हैं।
🔚
Pakistan में बढ़ता गैस संकट अब घरों की रसोई, महिलाओं की जिंदगी और आम लोगों की दिनचर्या को सीधे प्रभावित कर रहा है।
कभी आराम और स्थिरता का प्रतीक रही घरेलू जिंदगी अब गैस के “टाइम स्लॉट” पर निर्भर हो चुकी है।
लोगों की सुबह अब सूरज निकलने से नहीं, बल्कि चूल्हे में आग जलने से शुरू होती है।


