लोरमी/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद अब केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पत्र में अस्पताल पर स्वास्थ्य नियमों की अनदेखी, सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ नहीं देने और मरीजों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में कथित लापरवाही जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अस्पताल पहले से ही स्वास्थ्य विभाग की जांच का सामना कर रहा है। ऐसे में केंद्रीय स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद मामले ने और अधिक गंभीर रूप ले लिया है।
सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने का आरोप
लोरमी दौरे के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अपोलो अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना और छत्तीसगढ़ की खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ कई पात्र मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों से मरीज इलाज के लिए इस अस्पताल में आते हैं। यदि पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है, तो उन्हें भारी आर्थिक बोझ के साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ता है।
इसी आधार पर उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
स्वास्थ्य विभाग पहले ही कर चुका है जांच
इससे पहले 11 जुलाई को रायपुर और बिलासपुर के स्वास्थ्य अधिकारियों की संयुक्त टीम ने अपोलो अस्पताल का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान अस्पताल में मरीजों के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड, भर्ती प्रक्रिया, चिकित्सा दस्तावेज, प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया गया।
स्वास्थ्य विभाग की यह कार्रवाई अस्पताल के कामकाज और नियमों के पालन की समीक्षा के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि विभाग की ओर से जांच रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
एयर एंबुलेंस मामले ने बढ़ाई मुश्किलें
अस्पताल हाल ही में एक गंभीर मरीज के इलाज और रेफरल प्रक्रिया को लेकर भी सवालों के घेरे में आ गया। जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD) में कार्यरत राजकुमार अग्रवाल की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए हैदराबाद रेफर करने की सलाह दी। इसके बाद परिजनों ने लगभग 13 लाख रुपये खर्च कर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की, जो निर्धारित समय पर चकरभाठा एयरपोर्ट भी पहुंच गई।
अस्पताल पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि एयर एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए अपनी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई। उन्हें निजी एंबुलेंस की व्यवस्था करने के लिए कहा गया।
इतना ही नहीं, परिजनों का दावा है कि मरीज के साथ अस्पताल की ओर से कोई डॉक्टर या प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ भी नहीं भेजा गया। एयरपोर्ट पहुंचने के बाद मरीज की तबीयत और बिगड़ गई, जिसके चलते एयर एंबुलेंस की मेडिकल टीम ने तत्काल हैदराबाद ले जाने से इनकार कर दिया। मजबूरन मरीज को दोबारा अस्पताल लाना पड़ा।
विशेष मेडिकल टीम के बाद भेजा गया हैदराबाद
बाद में अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीज के लिए उन्नत फेफड़ा (लंग्स) सपोर्ट सिस्टम और अतिरिक्त विशेषज्ञों की आवश्यकता बताई। अगले दिन हैदराबाद से तीन सदस्यीय मेडिकल टीम बिलासपुर पहुंची।
पूरे दिन मरीज की स्थिति को स्थिर करने के बाद शाम के समय उसे फिर से एयर एंबुलेंस के जरिए हैदराबाद भेजा गया। इस दौरान भी निजी एंबुलेंस का इस्तेमाल किया गया। हालांकि इस बार हैदराबाद से आई मेडिकल टीम ने पहले एंबुलेंस और उसमें उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का निरीक्षण किया, उसके बाद ही मरीज को एयरपोर्ट ले जाने की अनुमति दी।
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रही शिकायतों और जांच के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े निजी अस्पतालों में मरीजों को समय पर उपचार, पारदर्शी व्यवस्था और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाना बेहद आवश्यक है।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित प्राधिकरण अस्पताल के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
स्वास्थ्य विभाग की जांच और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को भेजे गए पत्र के बाद अब सभी की नजर आगे की कार्रवाई पर है। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो अस्पताल प्रशासन के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
फिलहाल इस मामले में संबंधित विभागों की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी। अस्पताल प्रशासन की ओर से भी जांच प्रक्रिया में सहयोग किए जाने की बात कही गई है।


