दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Meta एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। Facebook, Instagram और WhatsApp की मालिक कंपनी ने वैश्विक स्तर पर करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी करने का फैसला लिया है। यह कंपनी के कुल वर्कफोर्स का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा माना जा रहा है।
मार्क जुकरबर्ग की अगुवाई वाली कंपनी अब तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित भविष्य की ओर बढ़ रही है। इसी रणनीति के तहत Meta ने न सिर्फ हजारों कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है, बल्कि 6,000 नई भर्तियों की योजना भी रद्द कर दी है। इसके साथ ही करीब 7,000 कर्मचारियों को AI से जुड़े कार्यों में शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है।
तीन चरणों में हो रही छंटनी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह छंटनी एक साथ नहीं बल्कि तीन अलग-अलग चरणों में की जा रही है। प्रभावित कर्मचारियों को तड़के स्थानीय समयानुसार सुबह 4 बजे नोटिस भेजे गए। कंपनी के जिन विभागों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है, उनमें कंटेंट मॉडरेशन, साइबर सिक्योरिटी और कंटेंट डिजाइन टीम शामिल हैं।
Meta की Integrity Team, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हेट स्पीच, फेक न्यूज और खतरनाक कंटेंट हटाने का काम करती थी, वहां भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छुट्टी हुई है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि AI के दौर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन का भविष्य कैसा होगा।
AI की तरफ तेजी से बढ़ रहा Meta
पिछले कुछ वर्षों में टेक इंडस्ट्री में AI को लेकर जबरदस्त प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। OpenAI, Google, Microsoft और Amazon जैसी कंपनियों के बीच AI रेस तेज हो चुकी है। ऐसे में Meta भी पीछे नहीं रहना चाहता।
कंपनी अब अपने संसाधनों को पारंपरिक टीमों से हटाकर AI डेवलपमेंट पर केंद्रित कर रही है। Meta का मानना है कि आने वाले समय में AI ही सोशल मीडिया, विज्ञापन, डिजिटल कम्युनिकेशन और वर्चुअल दुनिया की दिशा तय करेगा।
इसी वजह से कंपनी बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की भूमिका बदल रही है। जो कर्मचारी पहले दूसरे विभागों में काम कर रहे थे, उन्हें अब AI आधारित प्रोजेक्ट्स में लगाया जा रहा है।
कर्मचारियों में बढ़ रहा असंतोष
हालांकि कंपनी का यह फैसला कर्मचारियों के बीच असंतोष और चिंता पैदा कर रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Meta ने हाल ही में कर्मचारियों के डेटा और कार्यशैली को ट्रैक करने के लिए AI मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू किया था।
कई कर्मचारियों को डर है कि कंपनी उन्हीं के काम और डेटा का इस्तेमाल ऐसे AI मॉडल तैयार करने में कर रही है, जो भविष्य में उनकी नौकरियां खत्म कर सकते हैं।
इसी नाराजगी के चलते 1,500 से ज्यादा कर्मचारियों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर कर कंपनी से डेटा कलेक्शन बंद करने की मांग की थी।
एक कर्मचारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अब कर्मचारियों को ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वे खुद अपनी जगह लेने वाले AI सिस्टम को ट्रेन कर रहे हों।
टेक इंडस्ट्री में बढ़ता डर
Meta की यह छंटनी सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं है, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री में चल रहे बदलाव का संकेत है। AI के बढ़ते प्रभाव के कारण दुनियाभर की बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं और ऑटोमेशन की ओर तेजी से बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI लाखों पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर कंटेंट राइटिंग, डिजाइनिंग, कस्टमर सपोर्ट और डेटा प्रोसेसिंग जैसी नौकरियों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता है।
हालांकि दूसरी ओर AI नई तरह की नौकरियां भी पैदा करेगा। मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, AI इंजीनियरिंग और ऑटोमेशन मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में मांग तेजी से बढ़ सकती है।
कर्मचारियों को क्या मिलेगा?
Meta ने कहा है कि अमेरिका में निकाले गए कर्मचारियों को 16 सप्ताह का बेसिक सेवरेंस पैकेज दिया जाएगा। इसके अलावा कंपनी में जितने वर्षों तक कर्मचारी ने काम किया होगा, उसके आधार पर अतिरिक्त भुगतान भी मिलेगा।
फिर भी कर्मचारियों के लिए यह दौर मानसिक और आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। टेक सेक्टर में लगातार हो रही छंटनियों के कारण नई नौकरी पाना भी पहले जितना आसान नहीं रह गया है।
क्या AI इंसानों की जगह ले लेगा?
Meta की हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या AI भविष्य में इंसानों की नौकरियां पूरी तरह खत्म कर देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI कई कामों को तेज और आसान जरूर बना देगा, लेकिन पूरी तरह इंसानी रचनात्मकता, भावनात्मक समझ और निर्णय क्षमता को बदल पाना फिलहाल संभव नहीं है।
फिर भी यह साफ हो चुका है कि आने वाले समय में वही लोग सबसे ज्यादा सफल होंगे जो नई तकनीकों के साथ खुद को तेजी से ढाल पाएंगे।
टेक दुनिया का नया दौर
Meta की यह छंटनी केवल कर्मचारियों की संख्या कम करने का फैसला नहीं है। यह उस नए डिजिटल दौर की शुरुआत का संकेत है जहां कंपनियां कम मानव संसाधन और ज्यादा AI आधारित सिस्टम पर निर्भर होंगी।
दुनिया तेजी से बदल रही है। सोशल मीडिया कंपनियां अब केवल ऐप चलाने वाली कंपनियां नहीं रह गई हैं, बल्कि वे AI आधारित भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बनने की दौड़ में शामिल हो चुकी हैं।


