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सुपर अल-नीनो का खतरा: भारत में सूखा, कमजोर मानसून और भीषण गर्मी की बढ़ी आशंका

Posted on May 17, 2026

इस साल भारत के मौसम को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। एक तरफ पहले ही सामान्य से कम मानसून का अनुमान लगाया गया है, वहीं अब “सुपर अल-नीनो” के सक्रिय होने की आशंका ने हालात को और गंभीर बना दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो देश के कई हिस्सों में सूखा, भीषण गर्मी और जल संकट जैसी समस्याएं गहरा सकती हैं।

अमेरिका की प्रमुख मौसम एजेंसी National Oceanic and Atmospheric Administration यानी NOAA ने अपनी नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि मई-जुलाई के दौरान सुपर अल-नीनो विकसित हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी संभावना अब 82 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पिछले अनुमान से काफी अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर केवल मानसून तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खेती, जल संसाधन, बिजली उत्पादन और आम जनजीवन तक महसूस किया जाएगा।

आखिर क्या होता है अल-नीनो?

अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जो प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी के कारण उत्पन्न होती है। जब समुद्र की सतह सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाती है, तब दुनिया भर के मौसम पैटर्न प्रभावित होने लगते हैं।

भारत के लिए इसका सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ता है। सामान्य परिस्थितियों में हिंद महासागर और अरब सागर से आने वाली नमी भरी हवाएं देश में अच्छी बारिश लाती हैं, लेकिन अल-नीनो इन हवाओं की ताकत को कमजोर कर देता है। इसका परिणाम कम बारिश, लंबे सूखे और अत्यधिक गर्मी के रूप में सामने आता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि “सुपर अल-नीनो” सामान्य अल-नीनो से ज्यादा ताकतवर होता है। ऐसे समय में वैश्विक तापमान तेजी से बढ़ता है और कई देशों में मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है।

मानसून पर सबसे बड़ा असर

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। अगर सुपर अल-नीनो पूरी तरह सक्रिय हुआ, तो जून से सितंबर तक चलने वाला मानसून प्रभावित हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश का वितरण असमान रहेगा। कुछ इलाकों में अचानक भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है, जबकि कई राज्यों में लंबे समय तक सूखा पड़ सकता है।

कम बारिश का सीधा असर खेती पर पड़ेगा। धान, दालें, गन्ना, कपास और सोयाबीन जैसी फसलें मानसून पर काफी निर्भर होती हैं। अगर बारिश कम हुई तो उत्पादन घट सकता है, जिससे खाद्यान्न महंगे होने की आशंका बढ़ जाएगी।

किन राज्यों पर सबसे ज्यादा खतरा?

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत सबसे ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्र माने जा रहे हैं।

सबसे संवेदनशील राज्य:

  • पंजाब
  • हरियाणा
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से

मध्य प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, रीवा, सागर और जबलपुर संभागों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। वहीं राजस्थान और गुजरात के कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई गई है।

हालांकि कुछ क्षेत्रों जैसे लद्दाख, तेलंगाना और पूर्वोत्तर भारत के हिस्सों में इसका असर अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है।

गर्मी तोड़ेगी रिकॉर्ड

अल-नीनो का सबसे खतरनाक असर तापमान पर पड़ता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल भारत में लंबे समय तक हीटवेव चल सकती है। कई शहरों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

गर्मी बढ़ने से:

  • बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है
  • जलाशयों का पानी तेजी से घट सकता है
  • जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ सकता है
  • बुजुर्गों और बच्चों में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले महीनों में पानी का संकट भी गंभीर रूप ले सकता है।

दुनिया पर भी पड़ेगा असर

सुपर अल-नीनो का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा।

  • इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में सूखे की आशंका बढ़ेगी
  • प्रशांत महासागर के मध्य हिस्सों में भारी बारिश और चक्रवात आ सकते हैं
  • अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में मौसम असामान्य हो सकता है

वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग ने अल-नीनो जैसी घटनाओं को और अधिक खतरनाक बना दिया है।

ज्यादा बारिश के बावजूद क्यों बढ़ रहा सूखा?

हाल ही में प्रकाशित एक वैश्विक अध्ययन ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में कुल बारिश की मात्रा बढ़ रही है, लेकिन जमीन फिर भी ज्यादा सूखी होती जा रही है।

इसकी वजह यह है कि अब बारिश धीरे-धीरे होने के बजाय अचानक तेज तूफानों के रूप में होती है। बहुत कम समय में अत्यधिक पानी गिरने से मिट्टी उसे सोख नहीं पाती। पानी तेजी से बह जाता है और बाद में लंबे समय तक सूखा बना रहता है।

यानी भविष्य में केवल बारिश की मात्रा नहीं, बल्कि उसका पैटर्न भी बड़ी चुनौती बनने वाला है।

सरकार और किसानों के सामने चुनौती

यदि मानसून कमजोर रहा तो सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती खाद्यान्न सुरक्षा और जल प्रबंधन की होगी। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि:

  • जल संरक्षण योजनाओं को तेजी से लागू किया जाए
  • किसानों को कम पानी वाली फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जाए
  • बिजली और पानी की बचत पर जोर दिया जाए
  • हीटवेव से बचाव के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत की जाए

कई राज्यों ने पहले ही सूखा प्रबंधन और जल संकट से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है।

आने वाले महीनों पर टिकी नजर

फिलहाल मौसम वैज्ञानिक लगातार प्रशांत महासागर के तापमान और हवाओं की दिशा पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दो से तीन महीने तय करेंगे कि सुपर अल-नीनो कितना प्रभावी साबित होगा।

अगर स्थिति गंभीर हुई तो भारत को कमजोर मानसून, बढ़ती महंगाई, जल संकट और रिकॉर्ड गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में मौसम विभाग और सरकार दोनों के लिए यह साल बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

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