बंगाल की राजनीति में बढ़ता भूचाल, TMC नेताओं की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप : पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों लगातार उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC), जो लंबे समय से राज्य की सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है, अब अपने ही नेताओं पर लग रहे गंभीर आरोपों और लगातार हो रही गिरफ्तारियों के कारण मुश्किलों में घिरती नजर आ रही है।
कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के कई पार्षदों और नेताओं पर जबरन वसूली, धोखाधड़ी, धमकी और संपत्ति विवाद जैसे आरोप सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है। इसी कड़ी में वार्ड नंबर 42 के पार्षद महेश कुमार शर्मा की गिरफ्तारी ने पार्टी के भीतर बढ़ते संकट को और गहरा कर दिया है।
महेश कुमार शर्मा की गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल
बुधवार को बुराबाजार पुलिस स्टेशन की टीम ने TMC पार्षद महेश कुमार शर्मा को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई जनवरी 2025 में दर्ज एक मामले की जांच के आधार पर की गई।
शर्मा पर भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें आपराधिक साजिश, जालसाजी, धोखाधड़ी, जबरन वसूली और आपराधिक धमकी जैसे आरोप शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक पूरे मामले का विस्तृत खुलासा नहीं किया है।
राजनीतिक गलियारों में इस गिरफ्तारी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब किसी TMC नेता पर ऐसे आरोप लगे हों। पिछले कुछ समय से लगातार पार्टी नेताओं के खिलाफ शिकायतें सामने आ रही हैं।
पार्किंग और विकास परियोजनाओं से वसूली के आरोप
महेश शर्मा की गिरफ्तारी से पहले नरकेलडांगा क्षेत्र के वार्ड नंबर 36 के पार्षद सचिन सिंह को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
उन पर आरोप लगाया गया कि वे लंबे समय से स्थानीय पार्किंग ऑपरेटरों, व्यापारियों और छोटे प्रतिष्ठानों से अवैध वसूली कर रहे थे। इतना ही नहीं, विकास परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदारों से भी कथित तौर पर कमीशन और किकबैक मांगे जाते थे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जो लोग पैसे देने से इनकार करते थे, उन्हें धमकाया जाता था। कुछ मामलों में मारपीट और डराने-धमकाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
सुदीप पॉल की गिरफ्तारी ने बढ़ाई मुश्किलें
इन घटनाओं से कुछ ही दिन पहले वार्ड नंबर 123 के पार्षद सुदीप पॉल को भी करोड़ों रुपये की कथित वसूली के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
जब उन्हें अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया तो वहां भारी हंगामा देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की और गुस्से में अंडे तथा जूते तक फेंके। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया मौका मिल गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं जनता के बीच पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं।
TMC प्रवक्ता पर भी गंभीर आरोप
मामला केवल पार्षदों तक सीमित नहीं रहा। पश्चिम बंगाल पुलिस ने TMC के प्रवक्ता और राज्य उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार को भी हिरासत में लिया।
उन पर एक महिला को परेशान करने और उसकी संपत्ति पर अवैध कब्जा बनाए रखने के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता आरती रॉयचौधुरी ने दावा किया कि मजूमदार करीब 12 वर्ष पहले उनके घर में किराएदार बनकर आए थे, लेकिन बाद में उन्होंने किराया देना बंद कर दिया और मकान खाली करने से इनकार कर दिया।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि लंबे समय तक मानसिक दबाव और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें डराया गया।
पार्टी के अंदर बढ़ती बगावत
इन गिरफ्तारियों के बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। पार्टी के कई विधायक और वरिष्ठ नेता नेतृत्व को लेकर खुलकर सवाल उठाने लगे हैं।
बीते कुछ दिनों में पार्टी के अंदर कई घटनाएं तेजी से हुईं, जिनमें दिल्ली में अचानक हुई बैठकों से लेकर हस्ताक्षर जालसाजी विवाद और नेतृत्व संघर्ष तक शामिल हैं।
सबसे बड़ा झटका तब लगा जब करीब 60 विधायकों के एक समूह ने अलग रुख अपनाते हुए विधायक दल पर कब्जा करने का दावा किया। इस समूह ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना और विधानसभा स्पीकर से औपचारिक मान्यता भी प्राप्त कर ली।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह TMC के इतिहास का सबसे गंभीर आंतरिक संकट माना जा रहा है।
अभिषेक बनर्जी की बढ़ती भूमिका पर असहमति
पार्टी के भीतर असंतोष की एक बड़ी वजह अभिषेक बनर्जी की बढ़ती राजनीतिक भूमिका भी मानी जा रही है।
कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि पार्टी में निर्णय लेने की प्रक्रिया अब सीमित लोगों तक सिमटती जा रही है। इससे पुराने नेताओं और क्षेत्रीय इकाइयों में नाराजगी बढ़ रही है।
हालांकि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह के विभाजन से इनकार करता रहा है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं अलग तस्वीर दिखाती हैं।
विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा
बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही इन मामलों को लेकर TMC सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में भ्रष्टाचार, राजनीतिक संरक्षण और स्थानीय स्तर पर दबाव की राजनीति बढ़ती जा रही है।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि लगातार हो रही गिरफ्तारियां इस बात का संकेत हैं कि राज्य में सत्ता के संरक्षण में अवैध गतिविधियां चल रही थीं।
वहीं TMC का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
ममता बनर्जी के सामने बड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह दौर राजनीतिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
एक तरफ पार्टी के नेताओं पर लग रहे गंभीर आरोप हैं, दूसरी ओर अंदरूनी असंतोष और बगावत की खबरें पार्टी की साख को प्रभावित कर रही हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर जल्द ही संगठनात्मक सुधार और अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले चुनावों में इसका असर दिखाई दे सकता है।
जनता की नजर अब कार्रवाई पर
राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम जनता अब यह देखना चाहती है कि इन मामलों में जांच कितनी निष्पक्ष और तेज होती है।
लोगों की उम्मीद है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और राजनीतिक प्रभाव से ऊपर उठकर कानून का पालन किया जाए।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम केवल कुछ नेताओं की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता, संगठन और जनता के भरोसे से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि TMC इन संकटों से कैसे बाहर निकलती है और क्या पार्टी अपनी राजनीतिक पकड़ को पहले की तरह मजबूत बनाए रख पाती है या नहीं।


