देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG एक बार फिर चर्चा में है। परीक्षा से जुड़े विवादों का सिलसिला इस वर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा। पहले प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा रद्द होने को लेकर बहस हुई, फिर री-एग्जाम की घोषणा ने लाखों छात्रों को नई तैयारी के दबाव में डाल दिया। अब परीक्षा से ठीक पहले परीक्षा केंद्र आवंटन को लेकर सामने आए मामलों ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
नागपुर के एक छात्र को परीक्षा केंद्र के रूप में संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी स्थित विद्यालय का नाम मिलना और ओडिशा की एक छात्रा को 2300 किलोमीटर दूर देहरादून में केंद्र आवंटित होना चर्चा का विषय बन गया। इन घटनाओं ने परीक्षा प्रबंधन प्रणाली की विश्वसनीयता और तकनीकी प्रक्रियाओं पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे सामने आया अबू धाबी सेंटर का मामला?
नागपुर के छात्र अब्दुल्लाह मोहम्मद तालिब ने जब परीक्षा से पहले अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो वह हैरान रह गया। उसके एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र भारत के किसी शहर की बजाय अबू धाबी स्थित एक भारतीय स्कूल दिखाया गया था।
छात्र और उसके परिवार के लिए यह स्थिति पूरी तरह अप्रत्याशित थी। परिवार के अनुसार छात्र के पास पासपोर्ट तक नहीं था, ऐसे में विदेश जाकर परीक्षा देना संभव नहीं था। जब इस एडमिट कार्ड का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
कई लोगों ने इसे परीक्षा प्रणाली की बड़ी चूक बताया, जबकि कुछ लोगों ने तकनीकी गड़बड़ी की संभावना जताई। देखते ही देखते यह मामला राष्ट्रीय स्तर की बहस का विषय बन गया।
भुवनेश्वर की छात्रा को मिला देहरादून केंद्र
इसी दौरान ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर की एक छात्रा का मामला भी सामने आया। छात्रा को परीक्षा केंद्र के रूप में देहरादून आवंटित किया गया था, जो उसके निवास स्थान से लगभग 2300 किलोमीटर दूर था।
परीक्षा से कुछ दिन पहले इतनी लंबी यात्रा करना न केवल महंगा था बल्कि समय और मानसिक दबाव की दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण था। छात्रा के परिवार ने इस समस्या को अधिकारियों के सामने रखा, जिसके बाद केंद्र में संशोधन किया गया।
इन दोनों मामलों ने छात्रों के बीच यह आशंका पैदा कर दी कि कहीं उनके एडमिट कार्ड में भी ऐसी कोई त्रुटि न हो।
NTA ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया। एजेंसी का कहना है कि परीक्षा शहर में बदलाव संबंधित अभ्यर्थियों के रजिस्टर्ड लॉगिन के माध्यम से किया गया था।
NTA के अनुसार सिस्टम में दर्ज रिकॉर्ड बताते हैं कि शहर परिवर्तन की प्रक्रिया उम्मीदवारों के खातों से पूरी की गई थी। हालांकि, छात्रों द्वारा शिकायत किए जाने के बाद मामलों की समीक्षा की गई और आवश्यक संशोधन कर दिए गए।
एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित छात्रों के केंद्र बाद में उनके अनुरोध के अनुसार सही शहरों में आवंटित कर दिए गए।
आखिर री-एग्जाम की नौबत क्यों आई?
NEET-UG 2026 का आयोजन 3 मई को देशभर में किया गया था। परीक्षा के बाद कई राज्यों से प्रश्नपत्र लीक होने और कुछ अभ्यर्थियों तक परीक्षा सामग्री पहले से पहुंचने के आरोप सामने आए।
जांच एजेंसियों द्वारा प्रारंभिक जांच में कई अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद मामला गंभीर हो गया। शिक्षा जगत और अभिभावकों के बढ़ते दबाव के बीच परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे।
इसके बाद समीक्षा बैठकों और जांच रिपोर्टों के आधार पर परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया। छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दोबारा परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया गया ताकि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके।
एडमिट कार्ड को लेकर NTA का महत्वपूर्ण निर्देश
री-एग्जाम के लिए नया एडमिट कार्ड जारी किए जाने के बाद भी कई छात्रों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। इसे देखते हुए NTA ने स्पष्ट किया कि जिन अभ्यर्थियों ने नया एडमिट कार्ड पहले ही डाउनलोड कर लिया है, उन्हें इसे दोबारा डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं है।
एजेंसी ने बताया कि SMS, ईमेल और व्हाट्सएप पर भेजे जा रहे संदेश मुख्य रूप से उन छात्रों के लिए हैं जिन्होंने अभी तक नया एडमिट कार्ड डाउनलोड नहीं किया है।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि पहले जारी एडमिट कार्ड अब मान्य नहीं होंगे क्योंकि कई छात्रों के परीक्षा केंद्रों और शहरों में बदलाव किया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष फोकस
प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद इस बार परीक्षा सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। NTA और प्रशासनिक एजेंसियों ने बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
परीक्षा से पहले मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है ताकि सभी व्यवस्थाओं की जांच की जा सके। प्रश्नपत्रों और गोपनीय सामग्री को सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और विशेष एस्कॉर्ट टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
GPS ट्रैकिंग और CCTV निगरानी
इस बार सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। प्रश्नपत्र और अन्य संवेदनशील सामग्री ले जाने वाले वाहनों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है।
इसके अलावा सभी परीक्षा केंद्रों को CCTV निगरानी के दायरे में रखा गया है। परीक्षा गतिविधियों की लाइव मॉनिटरिंग केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से की जाएगी ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी व्यवस्थाएं परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
छात्रों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितताओं का सबसे अधिक असर छात्रों पर पड़ता है। कई अभ्यर्थी पहले ही प्रश्नपत्र विवाद और परीक्षा रद्द होने से मानसिक दबाव में हैं। ऐसे में परीक्षा केंद्र आवंटन जैसी समस्याएं उनकी चिंता और बढ़ा देती हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया जितनी अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित होगी, छात्रों का आत्मविश्वास उतना ही मजबूत रहेगा। इसलिए परीक्षा एजेंसियों को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।
निष्कर्ष
NEET-UG री-एग्जाम से पहले सामने आए परीक्षा केंद्र आवंटन के विवादों ने एक बार फिर परीक्षा प्रबंधन प्रणाली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि NTA ने इन मामलों का समाधान कर दिया है और विस्तृत सुरक्षा व्यवस्था का दावा भी किया है, लेकिन इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि लाखों छात्रों से जुड़ी परीक्षाओं में छोटी सी त्रुटि भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है।
अब सभी की निगाहें री-एग्जाम के सफल और निष्पक्ष आयोजन पर टिकी हैं। यदि सुरक्षा और पारदर्शिता के दावे जमीनी स्तर पर सफल होते हैं, तो यह छात्रों के विश्वास को दोबारा मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।



