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मध्य पूर्व में हथियारों की होड़: अमेरिका सबसे बड़ा सप्लायर, ईरान-रूस गठजोड़ मजबूत

Posted on March 18, 2026

मध्य पूर्व (Middle East) लंबे समय से वैश्विक हथियार व्यापार का एक प्रमुख केंद्र रहा है। हाल ही में Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) द्वारा जारी आंकड़ों ने इस क्षेत्र में हथियारों के आयात और निर्यात की एक स्पष्ट तस्वीर सामने रखी है। इन आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में वैश्विक हथियार आयात का लगभग 21% हिस्सा केवल मध्य पूर्व के देशों द्वारा किया गया। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं, भू-राजनीतिक तनाव और सैन्य शक्ति बढ़ाने की होड़ लगातार बनी हुई है।

पिछले एक दशक पर नजर डालें तो 2024 को छोड़कर लगभग हर वर्ष मध्य पूर्व ने दुनिया के कुल हथियार आयात का पाँचवां हिस्सा अपने नाम किया है। इसका मुख्य कारण क्षेत्र में चल रहे संघर्ष, जैसे यमन युद्ध, ईरान-सऊदी अरब तनाव, और इज़राइल से जुड़े विवाद हैं। इन परिस्थितियों ने देशों को अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर हथियार खरीदने के लिए प्रेरित किया है।

दूसरी ओर, Russia-Ukraine War के बाद वैश्विक हथियार व्यापार में बड़ा बदलाव देखने को मिला। यूरोप, जो पहले हथियारों के आयात में अपेक्षाकृत पीछे था, अब तेजी से आगे बढ़ा है। 2025 में यूरोप का हिस्सा वैश्विक हथियार आयात में 42% तक पहुंच गया, जो एक बहुत बड़ा उछाल है। इसका कारण है यूरोपीय देशों का अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना और संभावित खतरों के प्रति तैयार रहना।

मध्य पूर्व में हथियारों के सबसे बड़े सप्लायर के रूप में United States का दबदबा स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है। 2021 से 2025 के बीच, अमेरिका ने इस क्षेत्र को कुल आयातित हथियारों का लगभग 54% हिस्सा सप्लाई किया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि अमेरिका न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि सैन्य दृष्टि से भी इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बनाए हुए है। अमेरिका के बाद Italy (12%) और France (11%) का स्थान आता है।

मध्य पूर्व के कई प्रमुख देशों के लिए अमेरिका मुख्य हथियार आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। Saudi Arabia, Israel और Qatar जैसे देशों ने अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका पर भारी निर्भरता दिखाई है। उदाहरण के तौर पर, United Arab Emirates (UAE) ने पिछले दस वर्षों में अमेरिका से 13,000 से अधिक मिसाइलें खरीदी हैं। वहीं सऊदी अरब ने 89 लड़ाकू विमान, 150 से अधिक बख्तरबंद वाहन और लगभग 1,800 मिसाइलें अमेरिका से प्राप्त की हैं।

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि खाड़ी क्षेत्र के देश अपनी रक्षा क्षमता को तेजी से बढ़ा रहे हैं। इसके पीछे एक बड़ा कारण क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता है, विशेषकर ईरान और सऊदी अरब के बीच। जहां एक ओर सऊदी अरब और उसके सहयोगी देश पश्चिमी देशों से अत्याधुनिक हथियार खरीद रहे हैं, वहीं दूसरी ओर Iran ने अपनी सैन्य आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह Russia पर निर्भरता दिखाई है।

SIPRI के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में ईरान द्वारा आयात किए गए सभी हथियार रूस से ही आए हैं। इनमें मिसाइलें, लड़ाकू विमान और वायु रक्षा प्रणाली शामिल हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि ईरान ने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस के साथ अपनी सैन्य साझेदारी को मजबूत किया है।

इतना ही नहीं, ईरान का हथियार निर्यात भी रूस की ओर ही झुका हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के कुल हथियार निर्यात का लगभग 73% हिस्सा रूस को गया है। यह तथ्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग को दर्शाता है। खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान, ईरान द्वारा रूस को ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने की खबरें भी सामने आई थीं।

मध्य पूर्व के हथियार आयात और निर्यात के इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र न केवल सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील है, बल्कि वैश्विक शक्तियों के लिए रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। अमेरिका, रूस और यूरोपीय देशों के बीच यहां प्रभाव बढ़ाने की होड़ साफ दिखाई देती है।

इसके साथ ही, यह सवाल भी उठता है कि इतनी बड़ी मात्रा में हथियारों की खरीद क्या वास्तव में क्षेत्र में शांति ला पाएगी या फिर यह हथियारों की दौड़ भविष्य में और अधिक संघर्षों को जन्म देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कूटनीतिक समाधान और आपसी विश्वास नहीं बढ़ेगा, तब तक केवल सैन्य शक्ति के आधार पर स्थायी शांति स्थापित करना मुश्किल होगा।

अंततः, SIPRI की यह रिपोर्ट हमें यह समझने का अवसर देती है कि वैश्विक हथियार व्यापार किस दिशा में जा रहा है और किन क्षेत्रों में तनाव बढ़ने की संभावना अधिक है। मध्य पूर्व में बढ़ता हथियार आयात न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

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