दुनिया इस समय आर्थिक अस्थिरता, युद्ध जैसे हालात और भू-राजनीतिक तनावों से गुजर रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक सप्लाई चेन पर असर और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता ने कई देशों की अर्थव्यवस्था को चुनौतीपूर्ण दौर में ला खड़ा किया है। ऐसे समय में भारत सरकार अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने और विकास की रफ्तार को बरकरार रखने के लिए सक्रिय नजर आ रही है।
इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (PM-EAC) के सदस्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस उच्च स्तरीय बैठक में देश की आर्थिक स्थिति, वैश्विक संकटों का प्रभाव, विकास की नई रणनीतियां और व्यापारिक सुधारों पर विस्तार से चर्चा की गई। माना जा रहा है कि यह बैठक आने वाले वर्षों के लिए भारत की आर्थिक दिशा तय करने में बेहद अहम साबित हो सकती है।
भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाए रखने की तैयारी
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच स्थिर और मजबूत बनाए रखना था। दुनिया के कई विकसित देश जहां आर्थिक मंदी की आशंका से जूझ रहे हैं, वहीं भारत लगातार विकास दर को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
बैठक में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि कैसे भारत अपनी घरेलू मांग, उत्पादन क्षमता और निर्यात को मजबूत कर वैश्विक संकटों के प्रभाव को कम कर सकता है। परिषद के विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री को कई ऐसे सुझाव दिए, जिनसे देश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक बाजार और अधिक अस्थिर हो सकते हैं। ऐसे में भारत को आत्मनिर्भरता, तकनीकी निवेश, विनिर्माण क्षेत्र और सेवा क्षेत्र पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होगी।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ सुधारों पर विशेष फोकस
बैठक में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी व्यापार करने की प्रक्रिया को और आसान बनाने पर विशेष जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि यदि देश में निवेश और उद्योगों को सरल माहौल मिलेगा, तो रोजगार और आर्थिक विकास दोनों को गति मिलेगी।
इसके लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं—
- लाइसेंस और मंजूरी की प्रक्रियाओं को सरल बनाना
- डिजिटल सेवाओं को और मजबूत करना
- छोटे और मध्यम उद्योगों को राहत देना
- विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नए सुधार
- टैक्स व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना
- लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार
सरकार पहले भी ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों के जरिए व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाने की कोशिश कर चुकी है। अब वैश्विक संकट के दौर में इन सुधारों को और तेज करने की तैयारी दिखाई दे रही है।
‘ईज ऑफ लिविंग’ से आम जनता को राहत देने की योजना
बैठक में केवल उद्योग और निवेश की बात नहीं हुई, बल्कि आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी लगातार ‘ईज ऑफ लिविंग’ की बात करते रहे हैं, जिसका अर्थ है कि नागरिकों को सरकारी सेवाएं और सुविधाएं बिना परेशानी के मिल सकें।
इस दिशा में सरकार डिजिटल गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाएं, स्वास्थ्य सुविधाओं, परिवहन और शहरी विकास से जुड़े कई सुधारों को आगे बढ़ा सकती है। माना जा रहा है कि सरकार आने वाले महीनों में ऐसी नीतियां ला सकती है, जिनसे मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों को सीधा फायदा मिले।
पश्चिम एशिया संकट बना चिंता का बड़ा कारण
बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी गंभीर चर्चा हुई। इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में तेल और गैस आयात करते हैं, उनके लिए यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री के सामने यह आकलन रखा कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। इससे भारत में महंगाई, परिवहन लागत और उत्पादन खर्च प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि भारत पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और वैकल्पिक ऊर्जा पर भी तेजी से काम कर रहा है। सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर सरकार भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी कर रही है।
भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति पर भरोसा
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था कई मामलों में मजबूत दिखाई दे रही है। हाल के आंकड़ों में सेवा निर्यात, डिजिटल भुगतान, टैक्स संग्रह और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश में लगातार वृद्धि देखी गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी आगामी वित्तीय वर्षों के लिए भारत की विकास दर को सकारात्मक बताया है। सरकार का मानना है कि यदि सुधारों की गति बनी रहती है, तो भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रह सकता है।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि भारत को केवल संकट से बचना ही नहीं है, बल्कि इस दौर को अवसर में बदलना है। वैश्विक कंपनियां चीन से बाहर नए बाजार तलाश रही हैं और भारत इस अवसर का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।
युवाओं और स्टार्टअप सेक्टर पर रहेगा जोर
नई आर्थिक रणनीति में युवाओं, तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप सेक्टर को भी प्रमुख स्थान मिलने की संभावना है। सरकार चाहती है कि भारत केवल उपभोक्ता बाजार न बने, बल्कि तकनीकी और विनिर्माण शक्ति के रूप में उभरे।
इसके लिए स्किल डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर निर्माण, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजी में बड़े निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी होगी। यदि सही नीतियां लागू होती हैं, तो भारत वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में और मजबूत भूमिका निभा सकता है।
सरकार की सक्रियता का बड़ा संकेत
प्रधानमंत्री मोदी और आर्थिक सलाहकार परिषद की यह बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार वैश्विक हालात को लेकर पूरी तरह सतर्क है। आर्थिक चुनौतियों, पश्चिम एशिया तनाव और वैश्विक बाजार की अस्थिरता के बावजूद भारत अपनी विकास यात्रा को रुकने नहीं देना चाहता।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ जैसे सुधारों के जरिए सरकार देश को आर्थिक रूप से अधिक प्रतिस्पर्धी और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में इन बैठकों से निकले सुझाव भारत की आर्थिक नीतियों और विकास मॉडल को नई दिशा दे सकते हैं।
भारत फिलहाल उस मोड़ पर खड़ा है, जहां सही रणनीति और तेज फैसले उसे वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की राह पर और आगे ले जा सकते हैं।


