दुनिया की अर्थव्यवस्था एक बार फिर उथल-पुथल के दौर में प्रवेश करती दिख रही है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नए टैरिफ (आयात शुल्क) की घोषणा ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया है। इस फैसले का असर इतना तेज़ और गहरा रहा कि जापान से लेकर हांगकांग तक शेयर बाजारों में हाहाकार मच गया, वहीं भारतीय शेयर बाजार भी इस झटके से खुद को नहीं बचा पाया।
निवेशकों के बीच अनिश्चितता इतनी बढ़ गई कि कुछ ही घंटों में एशियाई बाजारों से अरबों डॉलर की पूंजी साफ हो गई। यह साफ संकेत है कि ट्रंप का यह कदम सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोरने वाला साबित हो सकता है।
क्या है ट्रंप का नया टैरिफ प्लान?
डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी पुरानी नीति “अमेरिका फर्स्ट” को आगे बढ़ाते हुए विदेशी उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने का संकेत दिया है।
इस योजना के तहत:
- एशियाई देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर ज्यादा टैक्स
- खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स, स्टील और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर असर
- अमेरिकी कंपनियों को घरेलू उत्पादन के लिए मजबूर करने की कोशिश
ट्रंप का मानना है कि इससे अमेरिका में नौकरियां बढ़ेंगी, लेकिन वैश्विक बाजार इसे ट्रेड वॉर की नई शुरुआत मान रहा है।
जापान से हांगकांग तक क्यों मचा हाहाकार?
जापान
जापान का शेयर बाजार इस खबर के बाद जोरदार गिरावट के साथ बंद हुआ।
- टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा टूटे
- निवेशकों को डर है कि अमेरिका में निर्यात महंगा होने से जापानी कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा
हांगकांग
हांगकांग का बाजार भी दबाव में नजर आया।
- ट्रेड और फाइनेंस सेक्टर में भारी बिकवाली
- विदेशी निवेशकों ने तेजी से पैसा निकालना शुरू किया
विशेषज्ञों का कहना है कि एशियाई अर्थव्यवस्थाएं अमेरिकी बाजार पर काफी निर्भर हैं, इसलिए टैरिफ का डर सबसे पहले यहीं दिखाई दिया।
भारतीय शेयर बाजार क्यों धड़ाम हुआ?
हालांकि भारत सीधे तौर पर ट्रंप के टैरिफ का मुख्य निशाना नहीं है, लेकिन फिर भी भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली।
इसके पीछे कई कारण हैं:
🔻 1. ग्लोबल सेंटीमेंट का असर
जब दुनिया के बड़े बाजार गिरते हैं, तो भारत भी उससे अछूता नहीं रहता।
🔻 2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
डर के माहौल में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू किया।
🔻 3. आईटी और मेटल सेक्टर पर दबाव
- आईटी कंपनियों की अमेरिकी कमाई पर असर की आशंका
- मेटल सेक्टर में टैरिफ बढ़ने का सीधा खतरा
नतीजा यह हुआ कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे छोटे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
निवेशकों में क्यों बढ़ा डर?
शेयर बाजार अनिश्चितता से सबसे ज्यादा डरता है, और ट्रंप का यह फैसला उसी अनिश्चितता को जन्म दे रहा है।
निवेशक इसलिए घबराए हुए हैं क्योंकि:
- ट्रेड वॉर दोबारा शुरू हो सकता है
- ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होगी
- महंगाई बढ़ने का खतरा
- ब्याज दरों पर दबाव
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर टैरिफ को लेकर बयानबाजी और तेज हुई, तो आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
क्या यह 2018 वाले ट्रेड वॉर की वापसी है?
ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को झटका दिया था।
अब हालात कुछ वैसे ही बनते नजर आ रहे हैं।
✔ तब भी टैरिफ बढ़े थे
✔ तब भी बाजार गिरे थे
✔ तब भी निवेशकों में डर था
फर्क बस इतना है कि इस बार वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रही है, जिससे खतरा और बढ़ गया है।
आम निवेशक क्या करें?
बाजार में गिरावट देखकर घबराना स्वाभाविक है, लेकिन जानकारों की राय थोड़ी संतुलित है।
विशेषज्ञों की सलाह:
- घबराकर शेयर न बेचें
- लॉन्ग टर्म निवेशक बने रहें
- मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर भरोसा रखें
- अफवाहों से दूर रहें
इतिहास गवाह है कि हर गिरावट के बाद बाजार ने वापसी की है, लेकिन इसके लिए धैर्य जरूरी है।
भारत के लिए खतरा या मौका?
कुछ अर्थशास्त्री मानते हैं कि ट्रंप के टैरिफ से भारत को नुकसान के साथ-साथ कुछ मौके भी मिल सकते हैं।
संभावित फायदे:
- कंपनियां चीन की जगह भारत में निवेश कर सकती हैं
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा
- “मेक इन इंडिया” को गति
हालांकि यह सब तभी संभव है जब भारत सही नीतिगत फैसले ले।
निष्कर्ष: दुनिया की नजर ट्रंप के अगले कदम पर
ट्रंप के नए टैरिफ ऐलान ने साफ कर दिया है कि वैश्विक बाजार आने वाले समय में बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं।
जापान, हांगकांग से लेकर भारत तक बाजारों की गिरावट इस बात का संकेत है कि निवेशक किसी भी बड़े फैसले को लेकर बेहद सतर्क हैं।
अब सबकी नजर इस पर है:
👉 क्या ट्रंप अपने टैरिफ प्लान पर पूरी तरह अमल करेंगे?
👉 क्या ट्रेड वॉर फिर भड़केगा?
👉 क्या बाजार इस डर से उबर पाएंगे?
एक बात तय है —
ट्रंप का एक फैसला पूरी दुनिया के बाजारों को हिला देने की ताकत रखता है।

