मथुरा | 16 दिसंबर, मंगलवार
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में यमुना एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हो गया। सुबह करीब 3:33 बजे, अचानक घने कोहरे की चपेट में आने से 8 यात्री बसें और 3 कारें आपस में भिड़ गईं। हादसा इतना तेज था कि एक्सप्रेस-वे पर कुछ देर के लिए यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात के अंतिम पहर में कोहरा तेजी से बढ़ गया था, जिससे दृश्यता महज कुछ मीटर तक सीमित रह गई थी। बताया जा रहा है कि आगे चल रही एक बस के अचानक ब्रेक लगाने के बाद पीछे से आ रहे वाहन एक के बाद एक टकराते चले गए। देखते ही देखते यह हादसा मल्टी-व्हीकल एक्सीडेंट में तब्दील हो गया।
मौके पर मची अफरा-तफरी
हादसे के बाद एक्सप्रेस-वे पर चीख-पुकार मच गई। कई यात्री बसों और कारों में फंस गए, जिन्हें बाहर निकालने के लिए स्थानीय लोगों और राहगीरों ने भी मदद की। कुछ वाहनों के आगे और पीछे के हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
सूचना मिलते ही पुलिस, यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA), एंबुलेंस और राहत दल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। घायलों को प्राथमिक उपचार देने के बाद नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। राहत एवं बचाव कार्य कई घंटों तक चला।
यातायात बाधित, लंबा जाम
हादसे के कारण यमुना एक्सप्रेस-वे पर दोनों ओर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाया गया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात बहाल किया जा सका। यात्रियों को काफी देर तक ठंड और कोहरे में परेशान होना पड़ा।
पुलिस की अपील
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हादसे का मुख्य कारण घना कोहरा और तेज रफ्तार माना जा रहा है। प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि—
- कोहरे में धीमी गति से वाहन चलाएं
- फॉग लाइट और इंडिकेटर का सही इस्तेमाल करें
- आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाए रखें
- अनावश्यक ओवरटेकिंग से बचें
जांच जारी
फिलहाल सभी घायलों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और हादसे से जुड़े तथ्यों की विस्तृत जांच की जा रही है। प्रशासन ने कहा है कि सर्दियों के मौसम में एक्सप्रेस-वे पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।



मथुरा के यमुना एक्सप्रेसवे पर घटित यह दर्दनाक सड़क दुर्घटना पूरे समाज को झकझोर देने वाली है। इस भयावह हादसे ने कई परिवारों से उनके अपने छीन लिए और साथ ही हमारी सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमियों को उजागर कर दिया। सुबह के समय घना कोहरा छाया हुआ था, जिससे सड़क पर कुछ भी साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था। इसी कारण 8 बसें और 3 कारें एक के बाद एक आपस में टकरा गईं और देखते ही देखते आग लग गई। इस दुर्घटना में कई लोगों की जान चली गई, जबकि अनेक यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
यह घटना हमें चेतावनी देती है कि मौसम संबंधी अलर्ट और दृश्यता से जुड़े संकेतों को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है। जब इतने अधिक यात्रियों की जान जोखिम में होती है, तब प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस और वाहन चालकों की साझा जिम्मेदारी बनती है कि वे सुरक्षा को सबसे ऊपर रखें, विशेष रूप से कोहरे जैसे जोखिम भरे हालात में। हादसे के बाद गति सीमा कम करना और नियमों को सख्त करना जरूरी कदम हैं, लेकिन असली समाधान तब होगा जब दुर्घटनाओं से पहले ही ठोस तैयारी की जाए। यह दुखद घटना सिखाती है कि सावधानी, अनुशासित ड्राइविंग और मजबूत यातायात व्यवस्था ही अनमोल जीवन की रक्षा कर सकती है। पीड़ित परिवारों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएँ हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की हम कामना करते हैं।